Birthday Wishes


मधु-विजय

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मेरी प्यारी बुआ

देखते ही देखते समय पंख लगा कर उड गया आपने जीवन के 75 वर्ष कब पार कर लिये पता ही नहीं लगा। मंगल मय प्रभु से प्रार्थना है, कि आपके आने वाले वर्ष खूब सुखी हो आपको सम्पूर्ण परिवार का स्नेह और आदर प्राप्त हो, ठाकुर जी के चरणो में अनन्य प्रेम और भक्ती हो।

जन्मदिन को इस शुभ आवसर पर हम दोनें का प्रणाम स्वीकार करें।

आपकी कृपाकांक्षी मधु-विजय

Rashmi

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जिन्दगी उसी को आजमाती है,
जो हर मोड पर चलना जानता है
कुछ पाकर तो हर कोई मुस्कराता है
जिन्दगी “बुआ” के जैसे जियो जो
सबको खुश रखकर मुस्कराना
जानती है।

Lakshmi Jain

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सौ. मृदुला का आग्रह हुआ आदरणीय उषा जीजी के 75 वे जन्म दिवस के लिये उनके साथ जुडी हुई कुछ यादें कुछ सुखद घटनाआंs को मै व्यक्त करु। अंतर कुछ सुखद अनुभतियॉँ कुछ भूली बिसरी यादें जो मेरी स्मृती पटल पर गहरी छाप छोड गई है व्यक्त करने का प्रयास कर रही हूं।

आदरणीय उषा जीजी मुझसे बडी है, पद मे भी और आयु मे भी। अंत सम्बोधन से पहले आदरसूचक शब्द आवश्यक है। मेरा प्रथम परिचय सम्मवत 1960-61 मे दिल्ली मे हुआ था जब मै बडी जीजी (सीता जीजी) के बेटे जितेन्द्र भैया के विवाह मे गई थी। मेरे साथ मेरा 2-3 साल का बेटा भी था। जीजी ने वहॉँ स्वयं ही परिचय पूछते हुऐ प्रश्न सूचक शब्दें में मुझसे पूछा ’आप गोरकपूर वाली भाभी है ना ? मैने हॉँ मे उत्तर देते हुऐ पूछा आप को कैसे मालूम पडा? तो बोली मुन्ना की शकल बिल्कुल भैया के जैसी है। वहॉँ उस छोटी सी मुलाकात में ही उनके बात करने का ढंग उनका सौम्य व्यवहार मन को छू गया।

दूसरी घटना मुझे याद है। जीजी-जीजाजी अपने मित्र दम्पीत के साथ नेपाल (Kalimpong) से बम्बई जाने हेतु गोरखपुर आये थे। आपने प्रवास के दौरान एक दो दिन उनको रुकना था शायद। उन लोगें का आतिथ्य कर मुक्त पतिपत्नी को बहुत ही अच्छा लगा। हमारे बम्बई आने पर जीजाजी हम लोगों से अवश्य मिलते। कभी पिक्चर ले जाते कभी रेस्ट्रॉँरनट कभी घर पर। अपने गोरखपुर आने का जिक जरुर करते और सराहना भी।

वक्त का पीछा चलता रहा। समय समय पर हम पारिवारीक शादी विवाहें मे कभी बम्बई या इलाहाबाद, कभी बैगलोर तो कभी गोरखपुर मे मिलना हुआ। यादें की कडियॉँ जुडती गई, निकटता बढती गई। कभी खाली समय में घटनाऍँ आखें के सामने चल चित्र की भॉँति घूम जाती है।

हमारा स्नेह जो एक बीज से अंकुरित होकर हमारे हदय में एक विशाल वृक्ष का रुप धारण कर चुका है क्या कभी घराशापी हो सकता है?

75 वे जन्म दिवस पर हम सब की हार्दिक शुभ कामनायं प्रेषित हैं। ईश्वर जीजी को बच्चें का तथा हम सब का प्यार और सन्मान प्रदान करते रहे; आजीवन स्वस्थ रखे।

शान्ती सिन्हा

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।। ॐ।।

शान्तीदेवी सिन्हा

ऊषा मेरी छोटी सी बहना,
शरल ह्यदय हरक्षण हॅंसते रहना ।
वाणी इतनी मधुर उसको क्या तुलना,
मान सन्मान इतना दे उसका क्या कहना ।
उषा मेरी छोटी सी बहना,
नाम सार्थक है ह्यदय में ऊषा की किरन तरते रहना
जब भी मिले बहुओ लडको का ही गुण गान करना,
प्रेम प्रीत से मिले सभी से एवं मन को भा जाना ।
ऊषा मेरी छोटी सी बहना ।।

सुलोचना जगदीश

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श्री“
पुज्य भाभीजी

“चरण स्पर्स प्रणाम”`
आपके जीवन के स्वर्णमय पचहत्तर बसंत आपको मुबारक हो आपसे मुझे हमेशा प्रेरणा ही मिली है, आपके रुप में मुझे एक अच्छी दोस्त मिले तथा बडी बहन का प्यार मिला आप जीवन में हमेशा अडिग अचल रही है| हमेशा दिव्य जीवन जीया है| परमात्मा से प्रार्थना है आपका जीवन हमेशा दिव्य रहे. स्वस्थ रहे!

ओस की बूंदो से नहाई हुई है “उषा”
पंछियें की चहचहाट में मुस्करा रही है “उषा”
फूलो के पराग में भवरें कि गुजंन में है “उषा”
जो हर हाल में मुस्कराये उसी का नाम है “उषा”

सुलोचना जगदीश